बैतूल, 21 अगस्त 2026। युवाओं को करियर निर्माण के लिए सही दिशा, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और बदलते समय के अनुरूप नए अवसरों से परिचित कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा शुक्रवार को आमला के सिटी मैरिज लॉन में ‘युवा संवाद—सपने, संवाद और सफलता’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली, कॉलेज और युवा विद्यार्थियों ने भाग लेकर शिक्षा, करियर, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास और नई तकनीकों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे, जनपद अध्यक्ष श्री गणेश यादव, उपाध्यक्ष श्री किशन रघुवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री नितिन गाडरे, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, एसडीएम सुश्री कामिनी ठाकुर, सीएमओ श्री नितिन बिजवे एवं तहसीलदार सुश्री रिचा कौरव ने मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के साथ कॉलेज के विद्यार्थियों और युवाओं को कक्षा 10वीं एवं 12वीं के बाद उपलब्ध शिक्षा एवं करियर विकल्पों, ग्रेजुएशन के बाद रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, व्यवसाय, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास तथा भविष्य में उभरते रोजगार अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस दौरान विद्यार्थियों को टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स के उपयोग से भी परिचित कराया गया।
आमला विधानसभा क्षेत्र के मेधावी विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
प्रतिभा और संकल्प के आगे आर्थिक परिस्थितियां नहीं बनेंगी बाधा : विधायक डॉ. पंडाग्रे
आमला विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि व्यक्ति में प्रतिभा, मेहनत और आगे बढ़ने का मजबूत संकल्प हो तो आर्थिक कठिनाइयां भी सफलता के मार्ग में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं। शासन द्वारा प्रतिभावान विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और आगे की पढ़ाई के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा को पहचानने और मेहनत व लगन के साथ लक्ष्य की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति को कभी भी सफलता के रास्ते की बाधा नहीं मानना चाहिए। शासन द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए सहायता देने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विधायक डॉ. पंडाग्रे ने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने और उसे हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास करने को कहा। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए किसी एक क्षेत्र तक सीमित रहना आवश्यक नहीं है। मेहनत, लगन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना के साथ व्यक्ति अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
उन्होंने चिकित्सक के रूप में सेवा करने के साथ राजनीति में कदम रखने और जनसेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने के अपने अनुभव को विद्यार्थियों के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखें और जिस भी क्षेत्र का चयन करें, उसमें पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करें।
जीवन में ‘क्यों’ का जवाब स्पष्ट हो तो मोटिवेशन अपने आप आता है : कलेक्टर डॉ. सोनवणे
कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में ‘क्यों’ का मजबूत होना बहुत जरूरी है। हम जो करना चाहते हैं, वह क्यों करना चाहते हैं, यदि इसका स्पष्ट जवाब हमारे पास है तो आगे बढ़ने का मोटिवेशन अपने आप पैदा होता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने सपनों को लेकर स्पष्ट रहें, अपनी क्षमताओं को पहचानें और निरंतर सीखते हुए आगे बढ़ें। विल पावर और डिटरमिनेशन पावर ऐसी शक्तियां हैं, जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी पीछे नहीं हटने देतीं।
कलेक्टर ने कहा कि किसी परीक्षा या प्रयास में असफल होने पर मानसिक दबाव या निराशा में जाने के बजाय कुछ समय रुककर शांत मन से परिस्थितियों को समझना चाहिए। अपनी गलतियों का विश्लेषण कर नए उत्साह और बेहतर तैयारी के साथ दोबारा प्रयास शुरू करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है और युवाओं को यह समझना होगा कि आने वाले समय में उनकी स्किल्स कितनी प्रासंगिक रहेंगी। बदलती तकनीक के अनुरूप स्वयं को तैयार कर युवाओं को रोजगार और करियर के लिए मजबूत बनना होगा।
कलेक्टर ने कहा कि युवा संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को इस दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करना है कि वे भविष्य में किस करियर क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता को पहचानकर उसे करियर में बदलने के लिए प्रेरित किया।
पारंपरिक सोच से आगे बढ़ाएं सपनों का दायरा
कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। ऐसे में युवाओं को अपनी सोच का दायरा बढ़ाने की जरूरत है। आज दुनिया में अवसरों की कमी नहीं है और टेक्नोलॉजी के माध्यम से घर बैठे भी ज्ञान और कौशल का विकास किया जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से पारंपरिक करियर विकल्पों तक सीमित न रहने और अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप नए क्षेत्रों में अवसर तलाशने की अपील की। करियर चुनते समय उन्होंने तीन महत्वपूर्ण पहलुओं—परिवार और माता-पिता की अपेक्षाएं, दूसरों से मिलने वाली जानकारी तथा स्वयं की रुचि और इच्छा—पर विचार करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि इन सभी पहलुओं को समझने के बाद अपनी वास्तविक क्षमता और रुचि के अनुरूप करियर का चयन करना चाहिए।
कलेक्टर ने अरुणिमा सिन्हा और सचिन तेंदुलकर के उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को कठिन परिस्थितियों में भी हार न मानने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कोई भी विषम परिस्थिति व्यक्ति की सफलता में स्थायी बाधा नहीं बन सकती। असफलताओं से सीख लेकर लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता के साथ लगातार आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सफलता के लिए हार्ड वर्क के साथ स्मार्ट वर्क भी जरूरी है। लक्ष्य तय करते समय यह भी सोचना चाहिए कि हमारा कार्य देश और समाज के विकास में किस प्रकार योगदान दे सकता है। हर परिस्थिति में प्रॉब्लम सॉल्विंग अप्रोच अपनाते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
इस दौरान कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने विद्यार्थियों के सफलता की परिभाषा, रोल मॉडल और यूपीएससी की तैयारी से जुड़े सवालों पर भी संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
डिग्री के साथ स्किल्स पर फोकस जरूरी
जिला ब्लड बैंक अधिकारी डॉ. अंकिता सीते ने प्रतियोगी परीक्षाओं और व्यवसाय की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने के साथ प्लान-ए और प्लान-बी तैयार रखने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि जीवन में लक्ष्य के साथ एक वैकल्पिक योजना होना भी जरूरी है। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। डिग्री के साथ अपनी स्किल्स को मजबूत करना सफलता की महत्वपूर्ण कुंजी है।
उन्होंने विद्यार्थियों को कम्युनिकेशन स्किल, लर्निंग स्किल, डिजिटल स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग, टाइम मैनेजमेंट, क्रिएटिविटी और लर्निंग एबिलिटी जैसी आवश्यक क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
सवाल विद्यार्थियों के, समाधान विशेषज्ञों के
कार्यक्रम में आयोजित इंटरैक्शन सेशन में विद्यार्थियों ने करियर से जुड़ी अपनी जिज्ञासाएं और उलझनें विशेषज्ञों के सामने रखीं, जिनका विस्तार से समाधान किया गया।
यूनिवर्सल हायर सेकंडरी स्कूल की छात्रा रिधा ने अपने भविष्य और जॉब प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी साझा की। कम उम्र में अपने करियर को लेकर स्पष्ट विजन रखने पर उसकी सराहना की गई। वहीं मोहित साहू ने आर्थिक स्थिरता के साथ स्किल डेवलपमेंट को लेकर अपनी रुचि व्यक्त की।
विद्यार्थियों को करियर के मिथ एंड रियलिटी, अपना रास्ता कैसे निर्धारित करें और करियर डेवलपमेंट साइकिल के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें स्वयं को जानने, संभावनाएं तलाशने, सही विकल्प का चयन करने और चुने गए लक्ष्य को पूरा करने के चरणों पर मार्गदर्शन दिया गया।
बदलती तकनीक में नए करियर अवसरों से कराया परिचित
युवा संवाद कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और बदलते समय में उपलब्ध नए करियर अवसरों की जानकारी दी।
पॉलीटेक्निक बैतूल के व्याख्याता श्री एस.के. डेंडरिया ने तकनीकी शिक्षा के विभिन्न पाठ्यक्रमों, कौशल विकास और रोजगार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। लंदन में विशेष बच्चों के लिए कार्यरत आमला की सुश्री शशि महाजन ने भी विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।
ई-गवर्नेंस प्रबंधक श्री विवेक सूर्यवंशी ने इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते महत्व तथा भविष्य में उपलब्ध करियर अवसरों की जानकारी दी।
विज्ञान के क्षेत्र में प्रो. लोकेश झरबड़े, सहायक प्राध्यापक रसायन, ने विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में अध्ययन एवं करियर की संभावनाओं से विद्यार्थियों को अवगत कराया।
वाणिज्य विषय पर डॉ. राजेंद्र गिरी गोस्वामी, सहायक प्राध्यापक वाणिज्य, ने कॉमर्स से जुड़े विभिन्न करियर विकल्पों और उच्च शिक्षा की संभावनाओं पर जानकारी दी। वहीं कला विषय पर डॉ. शंकर सातनकर, सहायक प्राध्यापक अर्थशास्त्र, ने युवाओं को अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुरूप विषय चयन तथा भविष्य की संभावनाओं के संबंध में मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे सोचने, अपनी रुचि और क्षमता को पहचानने तथा सपनों को स्पष्ट लक्ष्य में बदलकर निरंतर प्रयास करने का प्रेरक संदेश दिया। ‘युवा संवाद—सपने, संवाद और सफलता’ युवाओं के लिए केवल करियर मार्गदर्शन का मंच नहीं, बल्कि बदलते समय के साथ खुद को तैयार कर सफलता की नई राह बनाने का अवसर भी साबित हुआ।